डेढ़ रुपए का मास्क 17 में बेच रहे, भास्कर से बोला दुकानदार- 30 हजार मास्क भी दे दूंगा, पैसे नकद लेंगे, बिल नहीं मिलेगा

काेरोना वायरस से बचाव के तौर पर सबसे जरूरी चीज यानी मास्क की कालाबाजारी जोरों पर है। डिस्ट्रीब्यूटर, स्टॉकिस्ट, रिटेलर सभी अपनी कमाई के मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहते। स्थिति यह है कि सभी ने जेब भरने के लिए मुंह खोलना शुरू कर दिया है और स्टॉकिस्ट को ही 16 रुपए से 130, 250 और 450 में मास्क दिया जा रहा है। यानी आमजन तक पहुंचते-पहुंचते इसकी कीमत डेढ़ गुना तक हो रही है और लोगों की पहुंच से दूर हो रहा है।


बाजार में मास्क की कालाबाजारी उजागर करने के लिए भास्कर रिपोर्टर गुरुवार को फिल्म कॉलोनी पहुंचा और मुख्य डिस्ट्रीब्यूटर्स से मोलभाव करने पहुंचे। सभी ने अपनी शर्ते रखीं और कहा- माल जितना चाहो, नकद ले जाओ। बिल नहीं मिलेगा। माल लेना है तो सब कुछ हमारे अनुसार करना होगा, नहीं तो माल लेने वालों की कमी नहीं। हैरानी की बात है कि यह कालाबाजारी खुलेआम हो रही है लेकिन ड्रग विभाग कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। विभाग के एरिया इंस्पेक्टर दो दिन से फील्ड में भी जा रहे हैं लेकिन किसी को कुछ दिखा नहीं।


अजय सर्जिकल, फिल्म कॉलोनी : काउंटर पर युवती, बोली- ‌16 रु का एक मास्क, एन-95 तो 350 रुपए तक है


भास्कर : थ्री-लेयर वाले मास्क कितने का है? 
युवती : अभी नहीं है, शाम को पांच बजे आना। 


भास्कर : एक मास्क कितने का होगा?
युवती :  एक ~16 का मिलेगा। 


भास्कर : सिंपल बढ़िया वाला और एन-95 कितने का है?
युवती :  एक 130 रुपए का और दूसरा 350 रुपए। 


भास्कर : सभी मिलाकर 20,000 हजार चाहिए, डिस्काउंट बताओ? 
युवती : ऐसे कोई डिस्काउंट नहीं है। जो होगा, वो बाद में देख लेंगे।


गोयल सर्जिकल, फिल्म कॉलोनी : एक मास्क लो या दस हजार, एक पीस 17 रुपए का ही मिलेगा


भास्कर : थ्री लेयर वाले मास्क चाहिए, कितने रुपए का होगा?
दुकानदार : अभी 100 ही मिलेंगे, एक 17 का है। 


भास्कर : 10000 चाहिए, सही रेट बताओ? 
दुकानदार : एक ही रेट रहेगा। 


भास्कर : एन-95 वाला मिलेगा क्या? ज्यादा चाहिए, सही रेट बताओ?
दुकानदार : मिल जाएगा, 450 का एक मिलेगा। अभी तो यही रेट है, शाम को पांच बजे ले जाना।


भास्कर : बिल मिलेगा क्या?
दुकानदार : बिल नहीं मिलेगा, पूरा पैसा हाथों-हाथ कैश दे देना।


फिल्म कॉलोनी में तो साइिकल पर थैला लटककार भी बेच रहे


फिल्म कॉलोनी में अंदर घुसते ही साइकिल पर थैला लटकाकर मास्क बेचे जा रहे हैं। युवक बोला- एक मास्क 17 रु.का है। भास्कर ने जब मोलभाव किया तो केवल 50 पैसे कम किए। साथ ही बोला पूरे पैसे साथ ही देने होंगे। अभी तो मास्क मिल भी रहे हैं, बाद में आआेगे तो वो भी नहीं मिलेंगे।


एक दिन की कमाई 20 लाख तक, कई दिनों से चल रहा गोरखधंधा, अब तक करोड़ों कमा चुके
कोई भी दुकानदार मास्क बिल पर नहीं दे रहा है। वजह यह कि यदि बिल पर माल दे तो पकड़े जाना आसान होगा और कमाई नहीं कर पाएंगे। डेढ़ रुपए का मास्क यदि 17 रुपए में दे रहा है और एक लाख मास्क बेच दिए तो एक ही दिन में 20 लाख रुपए की कमाई एक डिस्ट्रीब्यूटर कर रहा है। लोगों ने बताया कि दोनों पिछले कई दिनों से यही काम कर रहे हैं। यानी कि पिछले तीन-चार दिनों में मास्क के डिस्ट्रीब्यूटर और स्टॉकिस्ट, रिटेलर करोड़ों की कमाई कर चुके हैं।


इधर,शिक्षा विभाग के आदेश- खांसी, जुकाम, बुखार के लक्षण हों तो स्कूल न आएं विद्यार्थी
कोरोना से स्कूली विद्यार्थियों के बचाव के लिए शिक्षा विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। इसमें कहा गया है कि अगर किसी विद्यार्थी को जुकाम, खांसी और बुखार के लक्षण हैं तो वे स्कूल न आएं। जिला शिक्षा अधिकारियों को कहा गया है कि वे इस वायरस से बचाव के लिए बच्चों को जागरूक करें। वहीं शहर के अधिकांश निजी स्कूलों ने कहा है कि अभी स्कूलों में परीक्षाएं चल रही है। इस दौरान प्रार्थना सभा नहीं होती। इसके बाद अगर जरूरत पड़ी तो वे प्रार्थना सभा का आयोजन नहीं करेंगे। 


जिस आईसीयू में इटली नागरिक था, उसमें भर्ती स्वाइन फ्लू मरीज की 3 दिन सोनोग्राफी नहीं की


कोरोना को लेकर भले ही अलर्ट जारी हो लेकिन एसएमएस अस्पताल में अन्य मरीजों को इस वजह से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिस सेतिया आईसीयू में इटली के पॉजिटिव केस को रखा गया था, उसमें भर्ती स्वाइन फ्लू पॉजिटिव केस को आईसीयू से निकाल दिया गया है। वहीं पूरे आईसीयू में कोई नहीं है और अभी इसे फ्यूमिकेट किया जाना बाकी है। लेकिन स्वाइन फ्लू के मरीज की हालत नाजुक बनी हुई है। मामले के अनुसार 25 साल की पूनम बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में भर्ती थी। वहां तबीयत बिगड़ी तो उसे 27 मार्च को जयपुर के एसएमएस अस्पताल में भर्ती कर लिया गया। पहले सामान्य वार्ड और बाद में दो मार्च को आईसीयू में भर्ती किया गया। लेकिन तबीयत खराब होती चली गई और दो को ही सोनोग्राफी लिखी। लेकिन जैसे ही स्टाफ को पता चला कि आईसीयू में कोरोना पॉजिटिव था, तीन दिन तक कोई भी जांच के लिए नहीं पहुंचा। अन्तत: 4 मार्च को उसे वापिस स्वाइन फ्लू वार्ड में भेज दिया गया। पिता रामलखन ने बताया कि इतने दिन में उससे 35 हजार रुपए की जांच और दवाएं मंगा ली गई हैं, लेकिन बच्ची को कोई फायदा नहीं हुआ।


एयरपोर्ट :  अब पूछ रहे लंबी बीमारी है क्या‌‌? सुरक्षा गार्ड व यात्री मास्क में


एयरपोर्ट पर अलर्ट जारी है। विदेशी यात्रियों की स्कैनिंग की जा रही है। उनसे डिक्लेरेशन फॉर्म भी भरवाया जा रहा है। इसमें उनसे पूछा जा रहा है कि क्या उन्हें कोई लंबे समय से बीमारी है? सुरक्षाकर्मियों व यात्रियों ने मुंह पर मास्क पहना हुआ था।


रेलवे स्टेशन-बस स्टैंड:  सिर्फ एक या दो यात्री ही पहन रहे मास्क


रेलवे स्टेशन और सिंधी कैंप बस स्टैंड से सबसे अधिक यात्री सफर करते हैं। ऐसे में वायरस फैलने का सबसे अधिक खतरा भी यहीं से है। लेकिन यहां एक-दो यात्री ही मास्क लगाए हुए दिखे। यहां स्क्रीनिंग जैसी कोई व्यवस्था भी नहीं है।